fake news
           

दुनियाभर के देश और उनकी सरकारें फेक न्यूज़ से परेशान हो चुकी हैं हालत ये है की कई देशों में इन फेक न्यूज़ की बदौलत सरकारे तक बदल गयी व कई लोगो को जान गंवानी पड़ी हैं .

सासका नाम के खोजी पत्रकार जो फेक न्यूज उद्योग पर रिसर्च कर रहे हैं का मानना है कि मैसिडोनिया एक ऐसा देश है जहां फेक न्यूज तैयार होने के साथ साथ बेची भी जाती है.

मैसिडोनियन लोगों को देश के बारे में खबरें फेसबुक और छोटी वेबसाइट चलाने वाले लोगों से ही मिलती हैं. इन खबरों पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है जिसका नतीजा है कि बीस लाख की आबादी वाला देश उन्हीं खबरों पर भरोसा करता है. ऐसी खबरें लोकतांत्रित व्यवस्था को खतरे में डालती हैं.

मैसिडोनिया का संवैधानिक नाम उत्तरी मैसिडोनिया करने के लिए जनमत संग्रह की स्थिति बनी है. प्रधानमंत्री जोरान जेव और उनके ग्रीक समकक्ष एलेक्सिस तिसप्रास भी तैयार हैं. हालांकि यहां के लोगों और स्थानीय भाषा को मैसिडोनियन के नाम से ही जाना जाएगा.मैसिडोनिया छोटा देश है जिसकी आबादी करीब बीस लाख है और बेहद गरीब देश है. मैसिडोनिया के संविधान का प्रारूप बनाने वाले लजोंबिर फ्रकोस्कि का कहना है कि किसी भी देश की जनता शांति और विकास चाहती है और मैसिडोनियावासी भी इसी की उम्मीद करते हैं.

 लोगों को जनमत संग्रह में भाग लेने से रोकने के लिए सुरक्षाकर्मी, विरोधी ताकतें और फर्जी खबरें या सोशल मीडिया पर अफवाह फ़ैलाने वाले इसके लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं. फेक न्यूज का सबसे अधिक इस्तेमाल इस छोटे से देश में ही होता है. इसी का नतीजा है कि जनता फर्जी खबरों के जाल में फंसकर गलत फैसला करती है.

पढ़े लिखे लोगो की टीम फेक न्यूज़ तैयार करने का काम करती हैं ,इसके लिए उन्हें पैसे भी दिए जाते हैं ,ज्यादातर फेक न्यूज़ के लिए काम करने वाले लोगो की उम्र बीस साल के आसपास होती हैं जो कुछ पैसों के लिए फेक न्यूज़ बनाने से लेकर उन्हें शेयर करने का काम करते हैं .

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