Reason of ticket cut gyandev ahuja and shaitan singh rathore

जयपुर | राजस्थान विधानसभा चुनाव में संघ के दो चहेते और हिंदूवादी विचारधारा के बीजेपी के दो विधायकों की टिकट काट दी गयी हैं इन विधायकों के नाम हैं रामगढ़ से ज्ञानदेव आहूजा और पोकरण से शैतान सिंह राठौड़. आखिर क्या कारण रहा कि मुश्किल सीटों पर पार्टी को विजय दिलाने वाले इन नेताओं को इस बार टिकट नहीं मिली.मुख्यतया दोनों का बडबोलापन केन्द्रीय नेतृत्व से सामंजस्य नहीं बिठा पाना इनके टिकट कटने का कारण बना.

पोकरण से शैतान सिंह का टिकट कटने का कारण

शैतान सिंह राठौड़ ने 2013 में जैसलमेर की पोकरण विधानसभा सीट से कांग्रेस के शाले मोहम्मद को पैंतीस हजार वोटो के बड़े अंतर से हराया था, जीतने के कुछ दिनों बाद ही शैतान सिंह का एक ऑडियो वायरल हुवा जिसमें कहा गया था कि वसुंधरा मंत्रीमंडल में शामिल किये गए लोग “चोर” है.वसुंधरा राजे के पास ये ऑडियो विरोधियों ने पहुंचा दिया जिसके बाद वसुंधरा राजे की लिस्ट से शैतान सिंह हट गए.

शैतान सिंह के विधायक बनने के कुछ महीनो बाद नाचना क्षेत्र के फार्म हाउस से मृत गौवंश जमीन में दबा पाया गया.हिंदूवादी संगठनों के अथक प्रयास और शैतान सिंह के विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने के बावजूद वसुंधरा राजे ने मानवेंद्र सिंह की सिफारिश पर आरोपी को बचा लिया. उसके बाद भी लगातार शैतान सिंह गौ हत्या पर बोलते रहे जो वसुंधरा राजे को पसंद नहीं आया. इसी मुद्दे पर जैसलमेर में धर्म सभा में संत सुरजनदास ने मंच से शैतानसिंह की मौजूदगी में वसुंधरा राजे को अपशब्द कहे.

उसके बाद एक के बाद एक शैतान सिंह के कई ऑडियो वायरल हुवे जिसमें वो मुसलमानों का विरोध करते तथा मुसलमानों के वोट नहीं चाहिए कहते दिखे. जिसका बीजेपी के मुस्लिम कार्यकताओं ने आलाकमान के सामने विरोध जताया.

भ्रष्टाचार:- शैतान सिंह के कार्यकाल में पोकरण विधानसभा क्षेत्र में सरकारी योजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार हुवा, नाचना उपनिवेशन का चालीस हजार बीघा जमीन का घोटाला सबसे चर्चित रहा. शैतान सिंह के विश्वासपात्र लोगो द्वारा ये कारनामे किये गए पर शैतान सिंह ने बीजेपी कार्यकर्ताओं की शिकायतों को अनुसना करते हुवे अपने विश्वास के लोगो पर ज्यादा भरोसा किया. जिसके कारण उनका जनाधार कमजोर होता गया.

रामगढ से ज्ञानदेव आहूजा का टिकट कटने का कारण

अलवर के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार से विधायक ज्ञानदेव आहूजा खुद टिकट को लेकर आश्वस्त थे. 1993 में पहली बार रामगढ़ से चुनाव लड़े आहूजा ने पहली बार जीत का स्वाद 1998 में चखा था, इसके बाद वे 2003 का चुनाव हारे थे. 2008 और 2013 में आहूजा ने रामगढ़ से कांग्रेस नेता जुबेर खान को हराया था.

ज्ञानदेव आहूजा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भरतपुर प्रचारक रह चुके हैं,इसके बाद इन्होंने भारतीय मजदूर संघ में लंबे समय तक कार्य किया,वहीं रामगढ़ के चुनावों में इनकी छवि फायर ब्रांड नेता की बनी थी.विधायक रहते हुए आहूजा ने अपने ही विधानसभा क्षेत्र मुख्यालय में थाने के बाहर दिनभर धरना दिया था.

ज्ञानदेव आहूजा अपने बयानों से देशभर में खुद को और अलवर को सुर्खियों में लाते रहे हैं,आहूजा 2016 में अपने उस बयान से सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने कहा था कि जेएनयू परिसर में प्रतिदिन हजारों कंडोम और और सैंकड़ों इस्तेमाल किए हुए अबॉर्शन इंजेक्शन मिलते हैं.

इसी वर्ष अगस्त में ज्ञानदेव आहूजा ने जवाहर लाल नेहरू को लेकर विवादित बयान दिया.  आहूजा ने कहा, ‘जवाहर लाल नेहरू पंडित नहीं थे, भला सुअर और गाय मांस खाने वाला पंडित कैसे हो सकता है.

अलवर में गाय तस्करों की कथित तौर पर पिटाई करने की एक घटना पर टिप्पणी करते हुए ज्ञानदेव आहूजा ने न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक कहा, “गौ तस्करी, गोकशी करोगे तो यूं ही मरोगे, उसे जनता ने नहीं पीटा, वो बहाना कर रहा है.

लव जेहाद और धर्म परिवर्तन पर ज्ञानदेव आहूजा ने कहा था ‘हमारी जो लड़कियां गई हैं, लव जेहाद का लोभ देकर ले गए हो, उसके लिए टाइम दूंगा, या उनको लाओ, नहीं तो फिर 10 गई हैं तो 20, 20 गई हैं तो 40 और 40 गई हैं तो 80, फिर तुम्हारी बेटियां सुरक्षित नहीं होंगी, क्योंकि तुमने गलत धर्म परिवर्तन किया है.’

रकबर प्रकरण में आहूजा के बयान राज्य सरकार की लाइन से अलग नजर आए थे ,इसके साथ ही उन्होंने कई ऐसे बयान दिए जो विवादित नजर आए.लोकसभा उपचुनाव में रामगढ़ से 37000 वोटों की हार भी टिकट कटने की वजह मानी जा रही है.

भ्रष्टाचार:-आहूजा ने पिछले दिनों खुले में स्वीकार किया था कि वे पैसे लेते हैं. ऐसे पैसे को वे समाज हित में खर्च करते हैं.ज्ञानदेव आहूजा ने अलवर में एक श्याम जागरण महोत्सव के दौरान मंच से कहा था कि, ” मेरा लंबा राजनीतिक जीवन हो गया है लेकिन कोई भी रिश्वत का पैसा घर में उपयोग नहीं किया है जो पैसा कोई अधिकारी या ट्रांसफर करवाने वाले लोग देकर जाते हैं वह मैं मंदिर गोशाला या गुरुद्वारों में दे देता हूं. जो पैसा लाख 50 हजार या 2 लाख ,कोई जेईएन,एईएन या एक्सईएन देता है वह भी मैं ऐसे ही उपयोग करता हूं. विधवा महिलाओं की बेटियों की शादी कराने और दूसरे धार्मिक कामों में उस पैसे को लगा देता हूं.”