saleh mohmmad being kafir after worship of loard shiva in temple

सालेह मोहम्मद मुस्लिम धर्मगुरु गाजी फ़कीर के बेटे है जो राजस्थान के जैसलमेर जिले की पोकरण विधानसभा क्षेत्र से चर्चित संत प्रतापपुरी जी महाराज को चुँनाव में हराकर अशोक गहलोत के प्यारे बने और राजस्थान में अल्पसंख्यक मामलात और वक्फ के मंत्री बनाये गए .

बीजेपी के हिन्दू – मुस्लिम ध्रुवीकरण को रोकने के लिए सालेह मोहम्मद ने साफा पहना, मन्दिरों में गए तिलक लगाये और शिवलिंग पर अभिषेक भी किया सालेह मोहम्मद सोशल मीडिया पर तो प्रसिद्ध हुवे पर कट्टरपंथी मौलवियों के निशाने पर आ गए हैं.

News State की एक खबर के अनुसार दिल्ली के एक उलेमा ने सालेह मोहम्मद को काफ़िर करार दे दिया हैं. राजस्थान के अल्पसंख्यक मंत्री सालेह मोहम्मद के भगवान शिव मंदिर में पूजा करने पर देवबंदी उलेमा ने कड़ा विरोध जताते हुवे कहा है कि जो अल्लाह के सिवाय किसी दूसरे की पूजा करता है वो इस्लाम से खारिज हो जाता है और उसको अपना निकाह भी दोबारा पढ़वाना चाहिए. साथ ही उसे अल्लाह से तौबा भी करनी चाहिए. 

उलेमा का कहना है कि साले मोहम्मद जो इस समय राजस्थान के मौजूदा विधायक है लेकिन वो सबसे पहले मुसलमान है. उन्होंने जो मंदिर में जाकर पूजा- अर्चना किया की है क्योंकि दूसरे लोग करते है. मैं उनसे यही कहता हूं कि ऐसे लोगों को तौबा करनी चाहिए. अल्लाह के सिवा जो किसी और को मानते हैं किसी और के सामने पूजा करते हैं शिक्र करते हैं माथा टेकते हैं ऐसे लोग अल्लाह से खारिज हो जाते हैं.

सालेह मोहम्मद को दी दुबारा कलमा पढने की सलाह – दिल्ली के इस उलेमा ने कहा, ‘वो सालेह मोहम्मद को सलाह देते हैं कि वो दोबारा कलमा पढ़ें और दोबारा निकाह पढ़ाए क्योंकि ऐसे आदमी का निकाह भी नहीं रहता क्योंकि उनकी बीवी मुसलमान है. उन्होंने ये कुफरिया हरकत की है कुफरिया काम किया है शिक्र की है मंदिर में जा कर पूजा की है तो ऐसे लोग इस्लाम से खारिज हो जाते हैं तो उनको तौबा करनी चाहिए और दोबारा कलमा पढ़ना चाहिए मैं उनको कलमा पढ़ने की दावत देता हूं और यह विधायक नेता ही नहीं इस तरीके का अमल कोई भी मुसलमान करता है तो वो इस्लाम से खारिज हो जाता है.’

इससे पहले बिहार के इस मुस्लिम मंत्री को भी पढ़ना पड़ा था दुबारा कलमा

khursid ahmad excuse for jai shree ram and say sorry to maulvi after fatwa

दरअसल बिहार सरकार के एक मंत्री खुर्शीद अहमद ने विधानसभा में जय श्रीराम का नारा लगाया था. खुर्शीद अहमद ने खुर्शीद ने कहा था कि जहां रहते हैं वहां अब तक उन्होने 28 मंदिर बनवाएं हैं. जिसके बाद बिहार के मौलाना ने फतवा जारी कर उन्हें इस्लाम से बाहर कर दिया था .

फतवे में मौलाना ने लिखा

  • जो मुसलमान श्रीराम का नारा लगाए और कहे कि मैं राम के साथ रहीम की भी पूजा करता हूं, मैं हिंदुस्तान के सभी धार्मिक स्थल पर माथा टेकता हूं, ऐसा इंसान इस्लाम से खारिज है.
  • ऐसे इंसान की बीवी निकाह से खारिज हो गई है.
  • ऐसे शख्स पर दोबारा इमान और निकाह और माफी लाजिमी है.
  • जब तब ऐसा इंसान तौबा न करे दूसरे मुसलमानों के लिए उससे किसी भी तरह के ताल्लुकात शरिया के मुताबिक जायज़ नहीं है.
  • ऐसे शख्स से बचे और दूसरे मुसलमानों को भी बचाएं.

फतवे के बाद खुर्शीद अहमद को इमारत-ए-शरिया के दफ्तर जाकर लिखित में माफ़ी मांगनी पड़ी और इस्लाम में दोबारा दाखिले के लिए कलमा पढ़ना पड़ा.

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