sanskrit language teacher sammelan

जयपुर, एक फरवरी। संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ0 सुभाष गर्ग ने कहा कि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार का कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत [ sanskrit language ] तमाम भाषाओं की जननी है। इस दिशा में सार्थक प्रयास किए जाएंगे ताकि वसुधैव कुटुम्बकम की विरासत को आगे बढाते हुए विश्व गुरू भारत फिर से सोने की चिड़िया बने।

डॉ गर्ग शुक्रवार को यहां राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर स्थित देराश्री शिक्षक सदन सभागार में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है। योग, वेद, उपनिषद्, ज्योतिष, खगोल व आध्यात्मिक धर्म शास्त्रों में संस्कृत की भूमिका अतुलनीय है। वसुधैव कुटुम्बकम की हमारी संस्कृति विश्व शांति का संदेश देती है।

संस्कृत एवं तकनीकी राज्य मंत्री ने कहा कि विरासत में मिले संस्कार व सांस्कृतिक परंपराओं को सहेज कर अगली पीढ़ी को देना आज की महत्ती आवश्यकता है। सूचना क्रांति के इस तकनीकी युग में संस्कारों का ह्रास कड़ी चुनौति है।

शिक्षण संस्थाएं सामाजिक सरोकारों से जुड़कर प्रदेश की प्रगति और राष्ट्र-निर्माण में सहभागी बनें। शिक्षक नैतिक मूल्य परक सादगी का अनुसरण करते हुए शिष्यों के लिए रोल मॉडल की भूमिका अदा करें। गणवेश जहां समानता सिखाती है वहीं सादा जीवन उच्च विचार की जीवन शैली शिष्ट आचरण।

इससे पूर्व सम्मेलन के शुभारम्भ के अवसर पर मंत्री डॉ गर्ग ने दीप प्रज्ज्वलित कर मां सरस्वती की पूजा अर्चना की। उन्होंने शिक्षकों की मांगे सुनी और विश्वास दिलाया कि प्रदेश की संवेदनशील, पारदर्शी व जवाबदेह सरकार जायज मांगो पर सकारात्मक निर्णय लेगी। इस दौरान जनप्रतिनिधि प्रवीण व्यास, कल्याण सहाय, महासचिव रतनलाल शास्त्री एवं शिक्षक संघ के प्रतिनिधि व शिक्षक गण मौजूद रहे।