जयपुर। नोर्थ इंडिया के बाजारों से इस बार दिवाली महापर्व का रंग गायब हैं। जो बाजार दिवाली करीब आते ही गुलजार हो जाते थे, उनमें सन्नाटा पसरा पड़ा है। व्यवसायियों का मानना है कि कमजोर लिक्विडिटी के चलते बाजार सूने पड़े हैं। देश के सबसे बडे राज्य राजस्थान में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं।

राजस्थान के व्यापारिक संगठनों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल बिक्री में कम से कम 30 फीसदी की कमी रहेगी। फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड इंडस्ट्री (फोर्टी) के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल का कहना है कि देश में बडी कंपनियां ऑनलाइन काम कर रही हैं, जिसने 20 फीसदी तक ऑफलाइन बाजार को प्रभावित किया है।

सुरेश अग्रवाल, अध्यक्ष, फोर्टी

सुरेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने जो भी कदम उठाए हैं वे भी कॉर्पोरेट्स और एफडीआई (FDI) को लेकर उठाए जबकि एमएसएमई (MSME) सेक्टर से सरकार का कोई सरोकार नहीं रहा। उन्होंने बताया कि बगैर एमएसएमई को राहत दिए इकोनोमी बूस्ट-अप संभव नहीं है। सुरेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि देश में ज्यादा से ज्यादा निजी क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए एमएसएमई क्षेत्र को राहत देने की जरूरत है।

यूं तो देश के बाजारों में सभी तरह के व्यापारों पर मंदी का साया है लेकिन सबसे ज्यादा असर रिएल एस्टेट, ज्वैलरी, टैक्सटाइल, ट्रांसपोर्ट और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर पडा है। इस फेस्टिवल सीजन में ये सभी सेक्टर मंदी से गुजर रहे हैं।

वहीं फोर्टी (Forti)के कार्यकारी अध्यक्ष कमल कंदोई का कहना है कि बाजार में व्याप्त मंदी से इंकार नहीं किया जा सकता। उनका कहा कि फर्निशिंग, ज्वैलरी (jewellery) और ऑटोमोबाइल उद्योग (automobile industry) मंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हांलाकि उन्होंने यह भी कहा कि ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रोनिक्स में फाइनेंस कंपनियों की मौजूदगी ने बाजार को संतुलित किया हुआ है। कंदोई ने कहा कि इस फेस्टिवल सीजन में जवाहरात कारोबार सबसे ज्यादा गिरावट पर है।