Jaipur/ राजस्थान विधानसभा का चतुर्थ सत्र 24 से

Jaipur/ राजस्थान विधानसभा का चतुर्थ सत्र 24 से


Jaipur News – राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) ने एक आदेश जारी कर पन्द्रहवीं राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Vidhan Sabha)का चतुर्थ सत्र शुक्रवार 24 जनवरी को प्रात: 11 बजे आहूत किया है।

इस संबंध में रविवार को राजस्थान विधानसभा सचिवालय की ओर से राजस्थान राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करवाई गई। सत्र की शुरुआत राज्यपाल अभिभाषण से होगी। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि अभिभाषण पर चर्चा के बाद सत्र का 15-20 दिनों के लिए  के लिए स्थगित कर दिया जाए।

सरकार की तरफ से यह विशेष सत्र एसटी,एससी आरक्षण को लेकर संविधान में किए गए 126 संशोधन पर राज्य विधानसभा के अनुसमर्थन के लिए जल्दी बुलाया गया है। हालांकि राज्यसभा सचिवालय की तरफ से विधानसभा को दस जनवरी तक  सत्र बुलाकर अनुसर्थन करने  के लिए लिखा गया था।

पर विधानसभा सचिवालय की तरफ से इसे लेकर सरकार को लिखने के बावजूद भी सरकार ने सत्र नहीं बुलाया। बताया जा रहा है कि राज्यसभा सचिवालय से फिर से इसे लेकर दबाव आने पर सरकार ने आनन-फानन में यह सत्र बुलाया है। सत्र की अधिसूचना जारी करने के लिए रविवार को विधानसभा सचिवालय खोला गया।

विधानसभा में साल के पहले सत्र की शुरुआत राज्यपाल अभिभाषण से शुरू होनी की परंपरा रही है। इसे देखते हुए राज्यपाल कलराज मिश्र के अभिभाषण से सत्र की शुरुआत होगी। 24 को राज्यपाल के अभिभाषण के बाद विधानसभा में संविधान में किए गए 126 संशोधन को लेकर अनुसर्मथन पारित किया जाएगा। लोकसभा-विधानसभा चुनावों में एससी-एसटी आरक्षण को 10 साल बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन पर संकल्प पारित किया जाएगा। 

विधानसभा के बजट-सत्र को लेकर सरकार में तैयारियां जोरों पर चल रही है। राज्यपाल के अभिभाषण को तय करने के लिए मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता वाली कैबिनेट सब कमेटी काम में जुटी हुई है। राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार के एक साल की प्रमुख उपलब्धियों को शामिल किया जाएगा।

बजट कब पेश किया जाएगा इसे लेकर अभी तारीख तय नहीं है। लेकिन सूत्रों की माने तो इस बार सत्र जल्दी शुरू होने से फरवरी में ही राज्य का बजट आने की संभावना है।

संसद से पारित लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं में एसटी,एससी सीटों के आरक्षण के संशोधन विधेयक को देश के कम से कम आधे राज्यों की विधानसभा में 25 जनवरी से पहले पारित करना जरूरी है। तब ही इसे राष्टï्रपति से मंजूरी मिल सकेगी। संसद के दोनों सदनों ने दस दिसंबर को  संविधान ( 126 वां संशोधन) विधेयक, 2019 पारित कर दिया है। 

विधेयक के पारित हो जाने से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन कर लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (एस.सी.) और अनुसूचित जनजाति (एस.टी.) के लिए सीटों का आरक्षण, जो आगामी 25 जनवरी, 2020 को समाप्त हो रहा था, उसे 10 वर्ष के लिए 25 जनवरी, 2030 तक बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 

विधेयक को केवल संसद के दोनों सदनों की ओर से पारित होने के बाद ही भारत के राष्ट्रपति की स्वीकृति नहीं प्राप्त हो जाएगी।  संविधान संशोधन विधेयक को राष्टï्रपति की स्वीकृति से पहले भारतीय गणतंत्र के सभी राज्यों में से कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों की ओर से इसका अनुसमर्थन (रेटिफिकेशन) करना भी आवश्यक है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 (2) में  यह उल्लेख है।

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ भी सत्र में प्रस्ताव  लाया जा सकता है।  केरल और पंजाब की सरकारों ने विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित कर दिया है।  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद इस कानून के खिलाफ खुल खिलाफत कर चुके हैं। इसे देखते हुए लग रहा है कि  राजस्थान सरकार भी  केरल और पंजाब की तर्ज पर प्रस्ताव पारित कर सकती है।