Proceeding against Dr. Rajkumar Gupta on taking money for free medicines
लाल घेरे में आरोपी डॉक्टर राजकुमार गुप्ता और जांच करते अधिकारी

नाचना / जैसलमेर:- राजस्थान सरकार ने पशुपालकों की सुविधा के तथा राज्य की बहुमूल्य पशुधन संपदा को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान किए जाने के उद्देश्य से पशुधन निशुल्क आरोग्य दवा योजना शुरू की थी जिसके अंतर्गत राज्य की सभी पशु चिकित्सा संस्थाओं एवं विभिन्न शिविरों के माध्यम से पशुओं के उपचार हेतु निशुल्क औषधियां उपलब्ध करवाई जा रही है.

मगर धन के लोभी कुछ पशु चिकित्सक अपनी कारगुजारियो से बाज नहीं आते और पशुपालकों के अनपढ़ होने का फायदा उठाते हुवे निशुल्क दवाइयों के भी पैसे ऐंठ रहे हैं.ऐसे ही एक मामले में आज जैसलमेर जिले के नाचना स्थित “अ” श्रेणी पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉक्टर राजकुमार गुप्ता के खिलाफ सयुंक्त निदेशक पशुपालन जैसलमेर के निर्देश पर विभागीय जांच शुरू की गयी हैं जिसमें बड़ा खुलासा होने की उम्मीद हैं.

बुजुर्ग की शिकायत पर हुई कार्यवाही तो डॉक्टर ने उगले कई राज

नाचना क्षेत्र के आसकंद्रा गाँव से साठ वर्षीय पशुपालक नखतसिंह 14 सितंबर को नाचना कस्बे के “अ” श्रेणी पशु चिकित्सालय में भेड़ बकरियों के लिए दवाई लेने आया था, योजना के अंतर्गत पंजीकरण स्वरूप राशि ₹2 प्रति केटल हेड की दर से देय हैं. इस हिसाब से नखतसिंह के 200 पशुओं के लिए चालीस रूपये बनते थे मगर डॉक्टर राजकुमार गुप्ता ने नखतसिंह से 250 रूपये ले लिए नखतसिंह के पास गाँव वापिस जाने का किराया भी नहीं बचा. डॉक्टर ने बिना 250 रूपये के दवाई देने से मना कर दिया तब मज़बूरी वश नखतसिंह ने 250 रूपये दिए और नाचना में ही रहने वाले कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता वीरेन्द्र सिंह आसकंद्रा को सारी बात बताई.

पशुधन आरोग्य निशुल्क दवा योजना
इस पर्ची पर हुई थी डॉक्टर गुप्ता की शिकायत

वीरेंद्र सिंह तथा अन्य लोग डॉक्टर गुप्ता के पास गए और पशु पंजीकरण व दवाई की पर्ची मांगी और शुल्क के बारे में पुछा तो गुप्ता ने 200 के आगे 200 और जोड़कर 400 पशु की दवाई की पर्ची बना दी और बाकी पैसे टीकाकरण के इंजेक्शन के जोड़ कर बता दिए.

नखतसिंह ने डॉक्टर के व्यवहार की शिकायत लिखित में जैसलमेर के सयुंक्त निदेशक पशुपालन विभाग को कर दी जिसके बाद शनिवार को विभाग के उपनिदेशक उमेश कुमार मामले की जांच के लिए पहुंचे इस दौरान कुछ पशुपालक भी उपस्थित रहे.

बुजुर्ग की शिकायत सही पायी गयी वंही अन्य अनियमिताएँ भी आई सामने

उपनिदेशक उमेश कुमार ने जयपुर न्यूज़ टुडे को बताया कि शिकायत की जांच की जा रही हैं और प्रथम दृष्टया पशु चिकित्सक डॉक्टर राजकुमार गुप्ता की गलती प्रतीत हो रही हैं आगे की कार्यवाही के लिए दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर उच्च स्तर भेजे जायेंगे.

नाचना पशु चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक,एक पशुधन सहायक तथा दो चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी कार्यरत हैं पर विभाग जांच की कार्यवाही होने के बावजूद डॉक्टर गुप्ता के अलावा अन्य कोई कर्मचारी चिकित्सालय नहीं पहुंचा.

उपस्थित पशु पालकों ने बताया कि यंहा कार्यरत डॉक्टर राजकुमार गुप्ता तथा पशुधन सहायक ओमप्रकाश कुमावत सरकारी टीकों को दस गुना ज्यादा दाम पर पशुपालकों को बेचते हैं और ज्यादातर पशु चिक्तिसालय में ताले ही लगे रहते हैं. पशुपालकों ने भामाशाह पशु बीमा योजना में भी बड़े घपले की आशंका जताई हैं.

ऊष्ट्र प्रजनन प्रोत्साहन योजना में गडबडी की शिकायत

प्रदेश में ऊंटो की घटती संख्या लेकर चिंतिंत राज्य सरकार ने पशुपालकों को प्रोत्साहन करने को लेकर ऊष्ट्र प्रजनन प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। गत वर्ष 2 अक्टूबर 2016 से प्रारंभ की गई योजना में ऊंट वंश का नर या मादा बच्चा (टोडिया) होने पर पशुपालक को तीन किश्त में दस हजार रुपए उपलब्ध कराए जाते है.

ऊष्ट्र विकास योजनान्तर्गत ऊंटनी के ब्याने पर उत्पन्न नर/मादा बच्चे (टोडिया) की आयु अनुरूप 10 हजार रुपए उपलब्ध कराए जाएंगे. इसमें एक माह की आयु पर 3 हजार, 9 माह की आयु पर 3 हजार एवं 18 माह की आयु पर 4 हजार रुपए की राशि उपलब्ध कराई जाएगी. ऊंटनी के ब्याने से पहले ऊष्ट्र वंशीय पशुओं को औषधियां, खनिज लवण एवं कृमिनाशक दवा विभागीय पशुधन नि:शुल्क आरोग्य योजना के प्रावधान अनुरूप उपलब्ध करवाई जाएगी.

इसके लिए पशु चिकित्सक के पास ऊंट का रजिस्ट्रेशन करवाना होता हैं और पशु चिक्तिसक द्वारा टैग लगाया जाता हैं या बाली पहनाई जाती हैं. नाचना क्षेत्र के पशु पालकों का आरोप है कि डॉक्टर राजकुमार गुप्ता नंबर वाले किसानो को टरकाते रहते है और पैसे देने वाले लोगो को टैग या बाली उनके हाथ में ही दे देते हैं. जबकि नियम हैं कि टैग पशु चिक्तिसक अपने हाथ से ही लगाएगा.

इनका कहना हैं :-

राज्य सरकार द्वारा पशुओं के टीकाकरण का टारगेट दिया हुवा हैं, टारगेट पूरा नहीं होने पर हमें वैक्सीन के पैसे जेब से भरने पड़ते हैं,इसलिए पशुपालकों को निशुल्क दवाई के साथ टीके भी दे रहे हैं. टीके का शुल्क पर्ची में नहीं लिखा जाता अलग रजिस्टर में एंट्री की जाती हैं.- डॉ. राजकुमार गुप्ता  (पशु चिकित्सक नाचना ).