• एक अनुमान के अनुसार स्ट्रोक भारत में मौत का एक प्रमुख कारण है, जिसमें 3 में से 1 स्ट्रोक पीड़ित इसका शिकार होता है।
  • उच्च आय वाले देशों की तुलना में भारत में इस प्रकार की अवस्थाएं अधिक हैं बेहतर जागरूकता और उपचार रणनीतियों की आवश्यकता

जयपुर, 28 अक्टूबर 2018। World Stroke Day के अवसर पर EHCC Hospital Jaipur के कन्सलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रविन्द्र सिंह राव ने इस बात पर जोर दिया कि स्ट्रोक के खतरों के बारे में आज हमें जागरूकता कायम करने की जरूरत है साथ ही ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाही करना आवश्यक है ताकि किसी जीवन को बचाया जा सके।

इस वर्ष विश्व स्ट्रोक दिवस की थीम रुअप अगेनआफ्टर स्ट्रोक रखी गई हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए ईएचसीसी हॉस्पिटल के कन्सलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रविन्द्र सिंह राव ने जयपुर मे इस बात के लिए जोर दिया है कि ऐसे रोगियों को समर्थन एवं मदद मिलना जरूरी है ताकि वे स्ट्रोक के बाद अपने पांवों से चल कर अपने घर पहुंच सके तथा अपना सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।

एक व्यक्ति को स्ट्रोक होता है जब मस्तिष्क में रक्त के थक्के या रक्त वाहिका को फटने के कारण मस्तिष्क के एक हिस्से में रक्त का प्रवाह कट जाता है, यदि यह कुछ सेकंड से अधिक समय तक होता है, तो मस्तिष्क पोषक तत्वों और ऑक्सीजन से वंचित होता है, जिससे मस्तिष्क कोशिकाएं मर जाती हैं जिससे अपरिवर्तनीय क्षति होती है।

डॉ रविंद्र सिंह राव, कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट, ईएचसीसी अस्पताल, जयपुर ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा ‘‘जब लोग स्ट्रोक पीड़ित होते हैं, तो वे उस पल में खुद की मदद करने में असमर्थ होते हैं। दुर्भाग्यवश, कई भारतीय इस तरह से एक रोगी को मदद देने के तरीके से पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं।

इसलिए हर किसी को मरीजों की पहचान करने के लिए स्ट्रोक के संकेतों से अवगत रहना चाहिए और तत्काल चिकित्सा ध्यान देने में उनकी मदद करना चाहिए। इसलिए रोगियों की पहचान करने के लिए हर किसी को स्ट्रोक के संकेतों से अवगत होना चाहिए और उन्हें तत्काल चिकित्सा ध्यान देने में सहायता करना चाहिए।

किसी स्ट्रोक आने पर एफ.ए.एस स्थितियां

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स्ट्रोक के तीन लक्षण हैंः कोई व्यक्ति जो स्ट्रोक से ग्रसित है यदि आप देखें तो उसमें यह तीन लक्षण दिखाई देंगेः
1. चेहरा यदि कोई व्यक्ति मुस्कुराने की कोशिश करता है तो उसका चेहरा मुरझाया नजर आता हैं
2. भुजाएं उसकी दोनों भुजाएं समान रूप से ऊंची नहीं उठा सकता, यदि वह उठाने का प्रयास करता है तब भी सफल नहीं होता
3.आवाज चाह कर भी वह सही नहीं बोल पाता उसकी जबान लड़खडाती है।

क्या करना चाहिए : ऐसी स्थिति मे जब स्ट्रोक के लक्षण हो केवल एक ही बात की जा सकती है,हर चीज का समय पर ध्यान रखना होगा और मरीज को समीप के किसी चिकित्सक तक या अस्पताल में तत्काल पहुंचाना चाहिए।

एक अध्ययन के अनुसार शहरी क्षेत्रों में काफी कम यानी 6.3 प्रतिशत नागरिक ही इन तीनो लक्षणों को पहचान पाते हैं वहीं 55 प्रतिशत भारतीय इन लक्षणों में से केवल एक की पहचान कर पाते हैं। कम जागरूकता के कारण रोगी को समय पर चिकित्सा नहीं मिल पाती और उसके स्वाथ्य में सुधार नहीं हो पाता।

स्ट्रोक के बाद के जीवन के बारे मे डॉ रविंद्र सिंह राव, कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट, ईएचसीसी अस्पताल, जयपुर का कहना था ‘‘जो लोग स्ट्रोक का सामना करते हैं वे अक्सर कुछ हद तक विकलांगता के साथ रहते हैं और महसूस करते हैं कि वे अकेले पीड़ित हैं।

स्ट्रोक के बाद जीवन के एक अलग तरीके से समायोजन रिकवरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू है। अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ काम करके, लक्ष्य निर्धारित करने और सुधार को ट्रैक करना, रोगी स्थिर और महत्वपूर्ण प्रगति कर सकते हैं। वर्तमान में हजारों रोगी खून पतल करने की दवाइयों पर निर्भर है क्यों कि यही एक मात्र समाधान है, लेकिन इन दवाइयों के भी साइड इफेक्ट संभव हैं मसलन हल्की सी चोट लगने पर काफी खून का बहना।

क्योंकि ये दवाएं आपके खून की क्षमता (एक दूसरे कण को जोड़ना) को दखल देने की क्षमता में हस्तक्षेप करके काम करती हैं, यह केवल आपके खून के थक्के बनने से रोकती हैं या पहले से मौजूद खून का अधिक लम्बा करती है। चिकित्सा के क्षेत्र में प्रगति के साथ, रोगियों के पास अब एलएएसी जैसी सर्जरी चुनने का विकल्प है जो उन्हें इस स्थिति से रोक सकता है।‘‘

जो लोग धूम्रपान करते हैं, मोटापे से ग्रस्त हैं, और उनके कोलेस्ट्रॉल के स्तर बढ गया है या उच्च रक्तचाप स्ट्रोक के उच्च जोखिम पर हैं। उच्च जोखिम श्रेणी में भी शामिल हैं वे रोगी जिनके पास एट्रियल फाइब्रिलेशन होता है और रक्त पतला होता हैं। इन रोगियों के लिए नॉन-वाल्वुलर दोष के साथ, लेफ्ट एप्रियल एपेन्डेज क्लोजर (एलएएसी) इम्प्लांट जैसे चिकित्सा उपकरण हैं जो स्ट्रोक के जोखिम को कम कर सकते हैं और खून बहने के खतरे को कम करने वाली दवा को खून बहने के जोखिम को खत्म कर सकते हैं।