Even today in Bhilwara, a shameful job like bonded labor is happening

jaipurnewstoday.com के लिए भीलवाडा से सुरेश चन्द्र शब्द की रिपोर्ट….

जंहा एक तरफ देश में आम लोकसभा चुनाव के जरिये लोकतंत्र का उत्सव मनाया जा रहा हैं, वंही दूसरी तरफ राजस्थान के भीलवाडा जिले में हजारों लोग बंधुआ मजदूर (Bonded Labor) बनकर गुलामी में जीने को विवश हैं। सरकार और प्रशासन की गरीब विरोधी नीतियों के कारण आज भी मजदूर अपनी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

भीलवाडा जिले के सैकड़ों ईंट भट्टों में गरीब मजदूरों से आज भी बंधुआ मजदूरी जैसा घिनोना काम करवाया जा रहा हैं, उत्तर प्रदेश, बिहार, और झारखंड से आए हुए प्रवासी मजदूरों से 12 घंटे से अधिक समय तक मजदूरी करवाई जाती है और कई जगह पर बिना पैसे सिर्फ खाना देकर काम करवाया जा रहा हैं। दबंग ईट भट्टे मालिक मजदूरों के साथ मारपीट करके बंधुआ मजदूरी करवा रहे हैं।

अधिकतर श्रमिक वंचित समुदाय से आते हैं एवं असंगठित क्षेत्र में कार्य करने के कारण किसी भी राजनीतिक दलों द्वारा मजदूरों के हित में आवाज नहीं उठाई जाती हैं। भीलवाड़ा जिले में सैकड़ों ईट भट्टे वैध एवं अवैध रूप से संचालित हैं जन्हा इन मजदूरों के साथ जानवरों जैसा सलूक किया जा रहा हैं।

भीलवाड़ा जिले के माण्डल तहसील के कंचन ईंट भट्टे पर 28 मजदूरों को बंधुआ बना रखा था

मानवाधिकार कार्यकर्ता रिंकु परिहार ने बताया की संस्थान प्रतिनिधियों द्वारा बुधवार को मजदूर दिवस (labor Day) के मौके पर उपखंड मजिस्ट्रेट माण्डल को इलाक़े के ईंट भट्टे पर बंधुआ मज़दूर होने की सूचना दी गई उपखंड मजिस्ट्रेट माण्डल के आदेश पर नायब तहसीलदार व संस्थान के सदस्यों द्वारा कार्यवाही कर 28 बँधुआ मजदूरों को मुक्त करवाया गया। देर रात कार्यवाही चलने के कारण रात में सभी मजदूरों को उपखड़ परिसर में ही रुकवाया गया व संस्थान के प्रतिनिधियों द्वारा रात को 12 बजे खाने की व्यवस्था की गई ।

मजदूरों ने बताया कि वो भट्टे पर 16 से 17 घंटे काम करते थे परंतु उनको कभी भी पेमेंट या वेतन नहीं दिया गया बस खर्चे पानी के पैसे 15 दिन में बहुत बार मांगने पर दे दिया जाता था वह दुकानदार से विनती करके उधार का सामान लाते थे ओर अपना पेट भरते थे ।

एक अन्य मजदूर राममूरत ने बताया कि उसके साथ भट्टे पर मारपीट होती थी पैसे मांगने व बिना बताए इधर उधर जाने पर भी मालिक द्वारा उसके साथ मारपीट व गाली गलौज की गई ।

संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सभी बाल बंधुआ मजदूरों को मुक्ति प्रमाण पत्र देने और नियोक्ता के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराके शीघ्र कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है जिससे सभी का पुर्नवास हो सके।