बारिश के शुरू होते ही जमीन के अंदर से लाल रंग का एक बहुत ही खूबसूरत जीव बाहर निकल आता है। वीर बहूटी-Veer Bahuti नाम का लाल रंग का मखमली कीड़ा बच्चों को बहुत लुभाता है।

वीर बहूटी का वैज्ञानिक नाम- Trombidium Holocericium है। अंग्रेजी में इसे Red Velvet Mite,True Velvet Mite या Rain Bugs कहते है।

इस लाल मखमली मासूम कीड़े के कत्ल से बनती है लकवे और नामर्दी की दवा 1

वीर बहूटी भारत के उत्तरी और मध्य हिस्से में बारिश के शुरुआती दिनों में दिखलाई देने वाला आठ पैरों वाला गहरे लाल रंग का एक मखमली कीड़ा होता है, जो देखने में मकड़ी के समान दिखाई देता है।

यह कीड़ा जहरीला नहीं होता है। इसे आप आसानी से उठा कर अपनी हथेली पर भी रख सकते हैं।

गांवों के बच्चे तो अक्सर बारिश के दिनों में अनेकों वीर बहूटियों को इकट्ठा करके पलाश के पत्तों या अपनी हथेली पर रखकर इन से खेला करते है।

इस खूबसूरत कीड़े को भारत के अलग अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। सबसे ज्यादा प्रचलित बीर बहूटी- Beer Bahuti या वीर बहूटी है।

आंध्र प्रदेश में इसे बेलवेट बूचि या अरुद्र पुरुगु, उड़ीसा में सधबा बोहु, गुजरात में गोकल गाय या मामा नी गाय, छत्तीसगढ़ में रानी कीट, उत्तर भारत के अनेको भागों में भगवान की बुढ़िया, और मध्य भारत के अनेकों भागों में राम जी डोकरी, मखमली कीड़ा के नामों से पुकारते हैं।

कहीं कहीं इसे “तीज” या”मादा मक्खी” तो कहीं “रानी कीड़ा” या लिल्ली घोड़ी नाम दिया गया है।

राजस्थान में इसे मखमलियो या मुमोलियो के नाम से पुकारा जाता है।

वैसे तो इस कीड़े का नाम वीर बहूटी है किंतु केवल नाम ही है, सही मायने में देखा जाए तो यह कीड़ा बहुत ही डरपोक और शर्मीला होता है।इसे जैसे ही हम छूते हैं या हाथ पर उठाते हैं ये अपने छोटे छोटे पैरों को सिकोड़ कर एक मखमल की गोली जैसा हो जाता है।

यह ऐसा खतरा समझ कर करता है। और फ़िर थोड़ी ही देर में जब इसे लगता है कि अब खतरा टल गया है तब अपने पैरों को खोल कर फ़िर रेंगने लगता है। यह कीड़ा मिट्टी में दबे सड़े गले कचरे को भोजन के रूप में उपयोग करता है।

इस खूबसूरत कीड़े की सुन्दरता का वर्णन हिन्दी साहित्य के कवियों ने जगह जगह किया है। इतना खूबसूरत होने के बावजूद हम मनुष्यों ने अपने स्वार्थ के लिये इस नन्हें जीव को भी नहीं छोड़ा और इसका उपयोग अपने फ़ायदे की दवाएं बनाने में करने लगे।

वीर बहूटी का सबसे ज्यादा उपयोग पैरालिसिस या लकवे के इलाज में होता है। लकवे से प्रभावित शरीर के अंगों पर इससे बने तेल की मालिश से लकवे का असर काफ़ी कुछ खत्म हो जाता है।

इसके साथ ही इसका इस्तेमाल जोड़ों के दर्द और कामेंद्री की शिथिलता के इलाज में भी होता है। जिन लोगो के लिंग में उत्तेजना नहीं आती वो रोगन बीर बहूटी-Rogan Beer Bahuti नाम से बिकने वाले तेल का प्रयोग करते है।

इस लाल मखमली मासूम कीड़े के कत्ल से बनती है लकवे और नामर्दी की दवा 2

इन कीड़ों से बहुत ही भीवत्स तरीके से दवाई बनाई जाती है, इस के लिए इन कीड़ों को हजारों की संख्या में मारकर सुखाया जाता है। फिर इन को जैतून या सरसों के तेल में पका कर दवाई बनाई जाती हैl

लेकिन अफ़सोस की बात यह भी है कि खेतों में रासायनिक खादों के अधिक उपयोग और बहुत बड़ी संख्या में दवाई बनाने में उपयोग के कारण अब यह खूबसूरत वीर बहूटी गांवों तक से गायब होती जा रही।

शहरों की तो बात ही अलग है। हमें अपनी प्रकृति के अनोखे वरदान इस नन्हें से जीव को भी बचाने की कोशिश करनी होगी।अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब धरती पर से गायब होते जा रहे जीवों की सूची में इस खूबसूरत नन्हें कीड़े “वीर बहूटी” का भी नाम जुड़ जायेगा।

आइए हम सब मिलकर इस नन्हें से खूबसूरत जीव का संरक्षण करें!

#केदारसैनीरूठियाई
7898915683

*समृध्दि पर्यावरण संरक्षण अभियान के अन्तर्गत खूबसूरत जीव वीर बहूटी की जानकारी के लिए जनहित में प्रेषित