सुरेश चंद्र (शब्द)@भीलवाडा |रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर जगदगुरु आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि राम व राष्ट्र के लिए समर्पण का होना अनिवार्य है।

समर्पण के लिए भक्ति होनी चाहिए। उन्होनें देश की राजनीति में नैतिक गिरावट पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि राजनीति पर धर्म का अंकुश हो। सत्ता व धर्मध्वजा के समन्वय से ही आंतकवाद से छुटकारा पाया जा सकता है।

चार्तुमास की घोषणा से पूर्व सोमवार को बारादरी में महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव के अंर्तगत अंतिम विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि रामस्नेही संप्रदाय अपने उदेश्यों के अनुरूप मानव सेवा, गौसेवा, चिकित्सा व शिक्षा सेवा सहित अन्य पुनित कार्य कर रहा है।

आचार्यश्री ने अगले वर्ष 2 फरवरी से 8 फरवरी तक सोड़ा में महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के त्रिशताब्दी प्राकट्य महोत्सव में अधिकाधिक भक्तों से शामिल होने का आव्हान किया।

संप्रदाय के आद्याचार्य का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि रामधर्म को छोड़ कर कोई भागे नहीं। संत व संप्रदाय के सानिध्य में रह कर कोई भी पक्षपात रहित मानवता से कार्य करें तो ही राष्ट्र सुरक्षित रह पायेगा।

शाहपुरा की धरा को तपोस्थली बताते हुए आचार्यश्री ने कहा कि यहां आकर अहां की माटी अपने ललाट पर लगाने वाला ही धन्य हो जाता है। यह सब आद्याचार्य का ही पुण्य प्रताप है।

आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि संसद से लेकर सड़क तक व्याप्त आंतकवाद की काली छाया के कोहरे को हटाने के लिए राम नाम स्मरण किया जाना जरूरी है। ऐसा किये बिना भवसागर की वैतरणी को पार करना कठिन है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म वहीं है जो अक्षय है। राम, राष्ट्र के अक्षय संबंध पर विचार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि अक्षय धर्म आत्म धर्म है। हमारा सनातन धर्म संपूर्ण विश्व में मानवता का संदेश दे रहा है।

विभिन्न प्रेरक प्रसंगो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मिथ्या से अहंकार का भाव पैदा होता है। अहंकार से कौरवों तक का सफाया हो गया था। गरीब में अहम न होने से वो सुखी है। विनम्रता से सब कुछ पाया जा सकता है।

भारतीय सनातन संस्कृति और महाप्रभु रामचरणजी महाराज के जीवन चरित्र पर प्रकाश ड़ालते हुए आचार्यश्री कहा कि किसी भी धर्म या मजहब की किसी भी रूप में निंदा करना नरक में जाने के समान है। राष्ट्र के व्यक्ति राष्ट्र में ही आग लगा रहे है। ऐसी विषम परिस्थितियों में हमें संयम से काम लेना होगा।