दीपावली के पर्व पर पटाखे फोड़ने या आतिशबाजी को लेकर बहस छिड़ी हुई हैं, पर्यावरण प्रेमी दीपावली पर पटाखे ना फोड़ने की सलाह दे रहे हैं वंही दुसरे लोग भी हैं जो इसे हिन्दुओं के त्योहारों पर अनावश्यक हस्तक्षेप मान रहे हैं. पर क्या आप जानते हैं कि दीपावली पर पटाखे फोड़ने की परंपरा कैसे शुरू हुई अगर आपको जानकारी नहीं हैं तो इस पोस्ट को पढ़े और शेयर करें.

आपको बता दें कि सबसे पहले पटाखे बनाने की शुरुआत चीन में हुई थी, कहानी के अनुसार चीन में एक रसोइये से गलती से पोटैशियम नाइट्रेट नाम का रसायन आग में गिर गया तो आग के रंग में बदलाव आ गया जिससे उसकी जिज्ञासा बढ़ गयी और उसने कोयले और सल्फर का मिश्रण आग में डाल कर देखा. मिश्रण आग में डालते ही जोर की आवाज हुई और रंगीन लपटें निकली. मान्यता हैं कि यंही से आतिशबाजी और पटाखों की शुरुआत हुई.

भारत में पटाखों की पहली फैक्ट्री शिवकाशी में शुरू हुई थी

भारत के तमिलनाडु राज्य में विरुधुनगर जिले में स्थित ” शिवकाशी ” शहर के रहने वाले दो भाइयों ने सबसे पहले भारत में पटाखा फैक्ट्री की शुरुआत की थी. 1923 में  पी. अय्या नादर और उनके भाई शनमुगा नादर कलकत्ता गए और वहाँ माचिस बनाने की एक फैक्ट्री में काम करने लगे कुछ समय बाद वे अपने शहर शिवकाशी लौट आए और खुद की माचिस की फैक्ट्री लगा ली. 1940 में अँग्रेजों के द्वारा विस्‍फोटक अधिनियम 1884 एवं विस्‍फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 में संशोधन किया गया जिसके बाद नादर ब्रदर्स ने अनिल नाम से पटाखे बनाने शुरू किये.

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जल्दी ही शिवकाशी पटाखा उधोग में एक बड़ा नाम बन गया और लोगो ने दीपावली व ख़ुशी के मौके पर पटाखे जलाने शुरू कर दिए मगर शिवकाशी के पटाखा उधोग में Child Labor का बड़े पैमाने पर उपयोग होने के कारण और पटाखा निर्माण के समय हादसों में कई बच्चों और मजदूरों की मौते होने से बदनामी भी हुई हैं.

anil taj crackers

Anil Fireworks आज भी पटाखों में एक बड़ा ब्रांड हैं और भारत के बड़े firecrackers manufacturer हैं.कंपनी की वेबसाइट पे दी गयी जानकारी में लिखा हैं कि “Anil Fireworks Factory, Sivakasi came into being in the year 1964, by its parent company National Matchworks of Anil group which was founded by Shri.A.P.R.S.P.Pavanasa Nadar, decades back in 1923.”

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