Indira Gandhi On Elephent Going To Belchi Bihar

jaipurnewstoday.com के लिए दिलीप सोनी की स्पेशल रिपोर्ट “जब हाथी पे बैठकर 15 किलोमीटर दूर बेलछी गयी इंदिरा गांधी-Indira Gandhi, उस फोटो ने दी इंदिरा की राजनीति को दी संजीवनी …..

आपातकाल के बाद हुए 1977 के ऐतिहासिक आम चुनावों में इंदिरा गांधी की बहुत बुरी तरह हार हुई थी,जिससे निराश होकर इंदिरा गांधी निराश घर पे बैठी थी. देश में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की सरकार चल रही थी कि अचानक से बिहार के एक दूरदराज गांव बेलछी में दलितों का यह जघन्य कत्लेआम हो गया.

500 लोगो की आबादी वाले छोटे से गाँव बेलछी में कुर्मी क्षत्रिय जाति के महाबीर महतो और परशुराम धानुक ने 27 मई 1977 को आठ हरिजनों और तीन सुनारों की एक साथ हत्या कर दी थी. उसके बाद बिहारशरीफ (नालंदा जिला) में 30 जुलाई 1977 को भड़की सांप्रदायिक हिंसा में चार परिवारों के लोग मारे गए. ये इंदिरा गांधी के लिए स्वर्णिम अवसर था कि वो हरिजनों और मुसलमानों की पार्टी के रूप में कांग्रेस की पहचान बनाएं.

अचानक से इंदिरा गांधी ने 11 अगस्त को फैसला लिया कि वो बेलछी गाँव में जाएगी, 13 अगस्त को मौसम ख़राब होने के बावजूद विमान से पटना हवाई अड्डे पहुंची और मीडिया को जानकारी दी गयी. इस खबर से देश की राजनीती में भारी हलचल मच गयी.

पटना हवाई अड्डे पर कुछ युवाओं ने नारे लगाये ” इंदिरा गांधी वापिस जाओ ” पर युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन्हें पीटकर भगा दिया. लोगो में जबरन नसबंदी के कारण और आपातकाल के कारण इंदिरा गांधी के प्रति जबरदस्त आक्रोश था.किसी ने सलाह दी कि मौसम ख़राब हैं और इंदिरा गांधी को बेलछी नहीं जाना चाहिए.

मगर जैसा कि सबको पता हैं इंदिरा गांधी जो ठान लेती थी उससे पीछे नहीं हटती थी, 35 कारों के काफिले के साथ इंदिरा गांधी रवाना हुई.वो पहली बार मखदुमुल मुल्क शाह याहया मिनेरी (Makhdummul Mulk Shah Yahya Meneri) की दरगाह पे गयी और वंहा नमाज अदा की , शोक संतप्त परिवारों से मिली और बिहार शरीफ और बेलछी के मध्य हरनौत पहुंची जन्हा से बेलछी 15 किलोमीटर दूर था.

कीचड़ भरे नदी नाले वाले रास्तों पर कार नहीं चल पायी तो इंदिरा गांधी की जीप में बैठाया गया,जीप भी ज्यादा दूरी तक नहीं चल पायी तो ट्रेक्टर मंगवाया गया मगर वो भी कीचड़ के गारे में फंस गया. तो इंदिरा गांधी ने पैदल चलना शुरू कर दिया कुछ किलोमीटर चलने के बाद उनको मोती नाम के एक हाथी पर बिठाने की व्यवस्था की गयी.

मोती को देखकर इंदिरा गांधी ने सांसद प्रतिभा सिन्हा से अनिच्छा से कहा ” चलो अच्छा हुवा बहुत दिन बाद हाथी पर चढ़ रही हूँ ” उनके साथ इस यात्रा में डॉ जगन्नाथ मिश्रा (पूर्व मुख्यमंत्री), केदार पांडे, पीसीसी प्रमुख, ए. पी. शर्मा, दिलकिशोर प्रसाद सिन्हा और भीष्म नारायण सिंह, सभी सांसद, सरोज खाबरे, युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, समाचारकर्ता और टीवी कैमरामैन और स्थानीय लोग थे.

जब इंदिरा गांधी छोटे छोटे गाँवों से गुजरने लगी तो लोगों ने उन्हें रोका, माला पहनाई और काफिले में शामिल हो गए। महिलाएं हाथ जोड़कर चिल्लाईं: “तुम हमारी तारणहार हो,आखिरकार तुम आए हो.” रिपोर्टिंग कर रहे दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार ने इस दृश्य को “शानदार” बताया था.

साढ़े तीन घंटे बाद इंदिरा गांधी जब बेलछी पहुंची तो शाम का समय था, बीमार बच्चे और विधवा औरते प्रलाप कर रही थी, इंदिरा गांधी ने उनसे बात करने के लिए हाथी को नीचे बैठाने को कहा ” हरिजन औरतों ने इंदिरा गांधी से कहा ” हमे बचाओ ….हम विनाश का सामना कर रहे हैं.

इंदिरा गांधी इसके अलावा कुछ नहीं कह सकती थीं कि वह अपने दल के साथ समस्या पर चर्चा करेंगी. उन्हें सांत्वना दी और उन्हें एकजुट होने और उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करने के लिए कहा. उन्होंने कहा, “मैं इन घटनाओं से बहुत ज्यादा परेशान हूं।”, ऐसी घटनाओं से देश कमजोर होगा.

अँधेरा ज्यादा हो रहा था,गाँव की महिलाओं ने इंदिरा गांधी को तली हुई पूड़ियाँ और फूलो की मालाओं के साथ विदा किया. मोती की घंटी के आवाज के साथ बाकी लोग पैदल पैदल अँधेरे में फिर साढ़े तीन घंटे के सफर के लिए निकल पड़े ….आधी रात से एक घंटा पहले इंदिरा गांधी पटना के रास्ते में बख्तियारपुर कॉलेज में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित कर रही थी .

स्रोत : इन्टरनेट पर उपलब्ध विभिन्न स्रोतों और समाचार पत्रों के संकलन से …