Jaipur News Today। राजधानी जयपुर के सिद्वम ईएनटी अस्पताल (Siddham ENT hospital) ने कान में ग्लोमस टयूमर (Glomus Tumor) जैसी दुर्लभ बीमारी का एण्डो स्कोपी तकनीक के जरिये पहली बार सफल आॅपरेशन कर चिकित्सा जगत में इतिहास रचा है। इस जटिलतम आॅपरेशन में कई (complications) थे। लेकिन अस्पताल निदेशक और ईएनटी विशेषज्ञ डाॅ. ऋषभ जैन के साथ उनकी टीम ने नवीनतम प्रयोगों के जरिये इस जटिलतम आॅपरेशन को सफल बनाने में कामयाबी हासिल की है।

दरअसल दौसा जिले की बांदीकुई तहसील के नागवास गांव के निवासी 55 वर्षीय रामवतार (बदला हुआ नाम) को 2- 3 साल से बाएं कान में टिन-टिन की आवाज आती थी। कान में तेज दर्द की शिकायत भी थी। रामवतार ने 28 अगस्त को सिद्धम ईएनटी अस्पताल में डॉ ऋषभ जैन को पहली बार दिखाया तो प्रारंभिक जांच करवाने के बाद पाया कि उसे ग्लोमस ट्यूमर नाम की दुर्लभ बीमारी है। मरीज को डॉ ऋषभ जैन ने बीमारी की जानकारी दी और ऑपरेशन की सलाह दी। मरीज की सहमति के बाद 31 अगस्त 2019 को ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन में करीब 90 मिनट का समय लगा और ऑपरेशन के दौरान खून का रिसाव 10ml से भी कम रहा। डॉ. ऋषभ जैन और उनकी टीम ने इस दुर्लभ बीमारी के ऑपरेशन में एंडोस्कोपी प्रोसीजर (endoscopy procedure) का इस्तेमाल कर इस जटिलतम ऑपरेशन को सरल बना दिया। 

संपूर्ण राजस्थान में अत्यंत सुविधाजनक तकनीक के जरिए कान के ग्लोमस ट्यूमर का यह पहला ऑपरेशन है, जो पूर्णतः सफल रहा। नई तकनीक के जरिए ग्लोमस ट्यूमर के जटिलतम ऑपरेशन को सरल और सुविधाजनक बनाने से मरीज के कान की नसों को ऑपरेशन के दौरान होने वाले खतरे से भी बचाया जा सका। इस ऑपरेशन के बाद मरीज में रिकवरी भी बहुत तेजी से हुई साथ ही उसको सुनाई भी ठीक दे रहा है।

कान के ट्यूमर कितने आम हैं?

कान में ग्लोमस ट्यूमर एक तरह का कैंसर (cancer) है। ज्यादातर मामलों में यह कैंसर कान के बाहरी त्वचा में शुरु होता है। 100 में से 5 से 10 केस ऐसे होते हैं जिनमें यह कैंसर कान की त्वचा पर विकसित होते है जबकि जो कैंसर कान के अंदर विकसित होते है वे बहुत दुर्लभ होते है। यूके में हर दस लाख में से 1 व्यक्ति हर साल कान के भीतर कैंसर से पीडित होता है। 

ग्लोमस ट्यूमर किन कारणों से होता है?

ग्लोमस कोशिकाओं के अज्ञात प्रसार के कारण ग्लोमस ट्यूमर बनता है, हालांकि कान में लगी चोट भी कभी कभार ग्लोमस ट्यूमर का रुप ले लेती है। ग्लोमस ट्यूमर का रंग त्वचा के रंग से मिलता जुलता होता है। ग्लोमस ट्यूमर के मामले नाखून के भीतर की त्वचा में भी पाये जाते हैं। ऐसे ग्लोमस ट्यूमर में पुनरावृत्ति (recurrence) के मामले ज्यादा सामने आते हैं। 

ग्लोमस ट्यूमर के लक्षण

आपका कान एक स्पंदन ध्वनि या आवाज के रुप में रक्त प्रवाह को महसूस कर सकता है।

-कान से खून बहना।

-श्रवण शक्ति की हानि- बढ़ता द्रव्यमान ध्वनि संचरण में हस्तक्षेप कर सकता है।

-प्रभावित कान का बजना, आवाज आना (tinnitus)

-अस्थिरता, संतुलन की हानि, चक्कर आना।

-चेहरे की सुन्नता और मांसपेशियों की गति की कमजोरी या हानि।

ग्लोमस ट्यूमर का ईलाज कैसे किया जाता है?

ग्लोमस ट्यूमर का उपचार मुख्य रुप से सर्जरी ही है।