manvedra singh not get ticket from congress

जयपुर/नई दिल्ली। रामगोपाल जाट

हाल ही में पचपदरा में स्वाभिमान रैली के बाद कांग्रेस पार्टी जॉइन करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे और बाड़मेर के शिव विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के विधायक मानवेंद्र सिंह जसोल का कांग्रेस में जाने का फैसला गलत होता दिखाई दे रहा हैं।

दरअसल, हाल ही में भाजपा से नाराजगी दिखाते हुए मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया था। उससे पहले उन्होंने बाड़मेर में राजपूत समाज के स्वाभिमान को चोट पहुंचाने का आरोप लगाते हुए स्वाभिमान रैली की थी।

राहुल गांधी ने मानवेंद्र सिंह कांग्रेस पार्टी जॉइन करवाई थी, तब सियासी गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे, कि बाड़मेर की शिव या अन्य किसी विधानसभा सीट से मानवेंद्र सिंह की पत्नी चित्रा सिंह को कांग्रेस विधानसभा का टिकट दे सकती है।

अब क्योंकि कांग्रेस पार्टी के द्वारा बीते रात जारी किए गए 152 प्रत्याशियों के नामों में ने तो मानवेंद्र सिंह का नाम है, ना ही चित्रा सिंह का। जबकि बाड़मेर की सभी सातों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।

मानवेंद्र सिंह और उनकी पत्नी चित्रा सिंह को टिकट नहीं मिलने के बाद एक बार फिर से राजपूत समाज में चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। बीजेपी ने अपने 162 उम्मीदवारों में 17 राजपूतों को टिकट दिया है, तो कांग्रेस पार्टी ने भी 13 टिकट दिए हैं।

ऐसे में कहा जाने लगा है कि मानवेंद्र सिंह ने अपने परंपरागत पार्टी छोड़कर कोई भूल तो नहीं कर दी है। गौरतलब है कि मानवेंद्र सिंह के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह जसोल तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेई सरकार में मंत्री हुआ करते थे।

लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में उनको टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया था। जसवंत सिंह फिलहाल एक दुर्घटना के बाद से कोमा में हैं।