the Rajasthan assembly elections 2018

नोखा.बीकानेर। चुनावी रण में इस बार बुरी तरह बिगड़े समीकरणों में उलझी कांग्रेस जबरदस्त संकटग्रस्त है,नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी की प्रतिष्ठा से जुड़ी सीट होने कारण बीकानेर में सबसे हॉट बनी इस सीट पर जीत दर्ज कराने के लिये कांग्रेस ने समूची ताकत झोंक रखी है।

लेकिन वोटों के बिगड़े समीकरण कांग्रेसी रणनीतिकारों के लिये चुनौति बने हुए है। जानकारी में रहे कि इस सीट पर अपनी जीत सुरक्षित करने के लिये रामेश्वर डूडी ने सबसे बड़ी चुनौति बने कन्हैयालाल झंवर का पलायन बीकानेर पूर्व सीट पर करवा दिया। क्योंकि पिछले चुनावों में कन्हैयालाल झंवर की कांग्रेस के निकटतम प्रतिन्द्वदी थे, पिछली बार भाजपा ने सहीराम विश्रोई को मैदान में उतारा था और निर्दलीय बिहारीलाल विश्रोई भी दमखम के साथ मैदान में मौजूद थे।

निर्दलीय होने के बावजूद भी बिहारी लाल ने रामेश्वर डूडी और कन्हैयालाल सरीखे दिग्गजों को कड़ी टक्कर थी। लेकिन इस बार नोखा में चुनावी मुकाबले के हालात खासे बदले हुए है। कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष के सामने अबकी बिहारी लाल विश्रोई भाजपा के दमदार प्रत्याशी बनकर मैदान में उतरे है, वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की इंदू देवी तर्ड और निर्दलीय मगनाराम केड़ली भी प्रभावशाली उम्मीदवार के रूप में मौजूद है।

कांग्रेस को उम्मीद थी कि कन्हैयालाल झंवर के बीकानेर पूर्व सीट की ओर पलायन कर देने से उनके वोटों का ध्रुवीकरण कांग्रेस की तरफ हो जायेगा, लेकिन परिणाम उल्ट नजर आ रहे है।

नोखा में जाट मतदाता कांग्रेस का मजबूत वोट बैंक माना जाता है लेकिन अबकी बार राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की इंदू तर्ड कांग्रेस के इस वोट बैंक पर सैंध मार सकती है,वहीं कांग्रेस के दलित वोट बैंक पर भी निर्दलीय मगनाराम केडली की सैंधमारी हो सकती है।

नोखा में जाटों की तरह विश्रोई भी बड़ा वोट बैंक है जिनका झुकाव भाजपा की तरफ नजर आ रहा है,वहीं ओबीसी,राजपूत और ब्राह्मण वर्ग का झुकाव भी भाजपा की तरफ नजर आ रहे है।

वोटों के इन बिगड़े समीकरणों केा उलझी कांग्रेस के लिये स्थितियां गंभीर बनी हुई है।

-सट्टा बाजार ने भी बढा दिये भाव-
नोखा के चुनावी रण में बिगड़े समीकरणों की हालत भांप कर अब सट्टा बाजार ने भी कांग्रेस के भावों में बढोतरी शुरू कर दी है,खबर है कि पिछले सप्ताह तक नोखा के सट्टा बाजार में कांग्रेस प्रत्याशी की स्थिति मजबूत बनी हुई थी,लेकिन बिगड़े समीकरणों की भनक लगने के बाद सट्टोरियों ने भी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।

इधर सियासी विश्लेषक भी चुनावी समर के शुरूआती दौर में नोखा से कांग्रेस को मजबूत आंक रहे थे,लेकिन अब वह भी कांग्रेस के लिये चुनौतिपूर्ण हालात मान रहे है।