भीलवाड़ा से सुरेश चंद्र (शब्द ) |शाहपुरा जिला भीलवाड़ा रामस्नेही संप्रदाय की प्रधान पीठ रामनिवास धाम में फूलडोल महोत्सव का समापन 25 मार्च सोमवार को अपरान्ह में होगा।

संप्रदाय के पीठाधीश्वर जगतगुरू आचार्यश्री रामदयालजी महाराज के चार्तुमास की घोषणा के साथ ही इसका समापन होगा। बारादरी में आज रविवार को प्रवचन सभा के दौरान चार्तुमास अपने शहर में कराने के लिए संतों ने अर्जी का वाचन किया।

भक्तों की ओर से अर्जीयां पेश करने के दौरान बारादरी में माहौल देखने योग्य बना रहा। चार्तुमास की अर्जियां भी सम्मानपूर्वक बारादरी में प्रस्तुत की गई जिनका सुंदर ढंग से संतों ने वाचन किया।

अब तक अहमदाबाद, पुष्कर, सोड़ा, महाजनपुरा, रेलमगरा, निंबाहेड़ा, भीलवाड़ा, मानवत, भावनगर के लिए चार्तुमास की अर्जियों को पेश किया गया।

सोमवार को प्रवचन के दौरान अभिजीत मुहर्त में आचार्यश्री की ओर से एक शहर में चार्तुमास की घोषणा की जायेगी। सोमवार को अंतिम दिन भी अर्जियां पेश होगी।

शनिवार को रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा के मुताबिक नया बाजार स्थित राममेडिया से आद्याचार्य की अणभैवाणी की शोभायात्रा निकाली गई। जो अब तक के आयोजन में ऐतिहासिक रही है।

आज शोभायात्रा में महिला पुरूष थाल सजा कर चल रहे थे। इसके अलावा भक्तजन भी पगड़ी पहने हुए थे।

शोभायात्रा में हजारों भक्त जन भक्ति भाव से चल रहे थे। इसके समापन पर बारादरी में चढ़ावा चढ़ाया गया तथा उपस्थित लोगों ने आचार्यश्री से आर्शिवाद प्राप्त किया।

बारादरी में विभिन्न स्थानों से आये भक्तजनों की ओर से आचार्यश्री का अभिनंदन किया गया तथा चढ़ावा चढ़ाया गया।

अल सुबह रामनिवास धाम में स्तंभजी के दर्शन के बाद बारादरी में रामधुनी के बाद मंगलाचरण आरती हुई। बारादरी में संतो की ओर से गादी स्थल व आचार्यश्री को प्रणाम करने के दृश्य को देखने के लिए भी वहां दिन भर भक्त जनों का तांता लगा हुआ है।

पंगत चैक में संतो के सामूहिक भोजन प्रसादी की आचार्यश्री की ओर से शुरूआत तथा आचार्यश्री के भोजन प्रसाद ग्रहण के अवसर पर सजने वाले थाल को देखने तथा उससे प्रसाद पाने की आकांक्षा में करीब दस हजार भक्त जन पंक्तिबद्घ होकर खड़े रहे।

महोत्सव में भाग लेने के लिए प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब, दिल्ली, गुजरात के अलावा अन्य देशों से हजारों की तादाद में भक्तजन शाहपुरा पहुंच गए है।

उनके आवास की व्यवस्था रामनिवास धाम ट्रस्ट की ओर से रामशाला भवन व रामकोठी आहता के अलावा शहर की अन्य धर्मशालाओ में की गई है।