Pt. Dayanand Shastri -Astro & Vastu Advisor

हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की स्थिति हमेशा बदलती रहती है और इनके बदलने से हमारे जीवन पर असर पड़ता है कभी- कभी दुःख का कारण भी बनते है.

बसपा का चुनाव चिन्ह बैगनी रंग है… अतः शनि का प्रतीक

सपा के चुनाव चिन्ह में लाल रंग है अतः मंगल…

जब कभी दो ग्रहों के मिलने का योग बनता है और ऐसे में शनि मंगल का योग ज्योतिष शास्त्र में शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि इससे दुर्घटना और प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ जाती है।

मंगल को क्रूर ग्रह माना जाता है. मंगल ग्रह ऊर्जा शक्ति एवं पराक्रम का कारक है. इसके अलावा रक्तपात एवं उनसे संबंधित बीमारियों का भी प्रतिनिधित्व करता है जहां शनि पहले से ही विद्वान है जिससे दोनों के बीच युति संबंध बन रहा है. ज्योतिष में क्रूर और पाप ग्रह का यह मिलन अशुभ और विनाशकारी माना जाता है.

परिणाम के लिये मात्र 3 महीना प्रतीक्षा करें।
इनका गठबंधन(SP-BSP alliance) प्रभावी हुआ-कल, शनिवार।12 जनवरी 2019 को।
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अखिलेश यादव की जन्म कुण्डली

गूगल से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उत्‍तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव का जन्‍म 1 जुलाई 1973 में सैफई में हुआ था। उत्तरप्रदेश के कद्दावर नेता व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के इंजीनियर पुत्र अखिलेश यादव उत्तरप्रदेश के किंग मेकर के रूप में उभरे हें।
प्राप्त विवरण के आधार पर जो कुंडली तैयार हुई वह कुछ इस प्रकार है:–
इस कुंडली में लग्‍न स्‍वामी का उपनक्षत्र स्‍वामी जो कि शुक्र है 11वें घर में बैठा है। यह स्‍वयं गुरू के नक्षत्र में हैं जो कि 6ठें भाव में है। यहां पर एक बार फिर से शनि 5वें, 6ठें, 11वें और 12वें भाव का उपनक्षत्र स्‍वामी है और बुध के नक्षत्र में विराजमान है।

अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को वृश्चिक लग्न कर्क राशि में हुआ। वृश्चिक राशि स्थिर राशि होकर लग्नस्थ भी है। मंगल पृथ्वी पुत्र है। पराक्रम का प्रतीक है। यही वजह है कि अखिलेश ने जमीन से जुड़ कर शानदार सफलता हासिल की।

उज्जैन (मध्यप्रदेश) के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार अखिलेश यादव की पत्रिका में लग्न व षष्टम (शत्रु भाव) का स्वामी मंगल पंचम भाव में है। वहीं पंचमेश गुरु वक्री होकर तृतीय भाव में है। वहीं से भाग्य के स्वामी चन्द्रमा पर पूर्ण सप्तम दृष्टि पड़ रही है, यह गजकेसरी नामक राजयोग बना रहा है।

सूर्य अपने ही नक्षत्र में है लेकिन यह शनि का उपनक्षत्र स्‍वामी होकर 8वें भाव में बैठा है। आठवें भाव का ऐसा ही संबंध इनकी जन्‍म कुंडली में भी देखने को मिला था। शनि अपने उपनक्षत्र में होकर बुध के नक्षत्र में है।

कृष्‍ण मूर्ति जी के अनुसार वह उपनक्षत्र स्‍वामी ही होता है जो यह तय करता है कि मिलने वाला फल मी‍ठा होगा या कड़वा। इसलिए आठवां भाव और मजबूत हो जाता है क्‍योंकि दशा और अंतरा स्‍वामी के उपनक्षत्र स्‍वामी यहीं पर स्थित हैं। इस तरह सितारे अखिलेश की जीत की पूरी कहानी नहीं कहते। उत्‍तर प्रदेश में राजनीतिक हालात बहुत रोमांचक हो गए हैं ।

दशम भाव राजनीति व पिता का है। वैसे पिता की स्थिति का अंदाजा नवम भाव से भी लगाया जाता है। यहां यानी भाग्य भाव नवम में अखिलेश की कुंडली में बुध, शुक्र व चन्द्र है। इसी वजह से पिता का भरपूर सहयोग रहा।


उज्जैन (मध्यप्रदेश) के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि सूर्य की स्थिति अष्टम भाव में होकर मित्र राशि मिथुन में है। अष्टम भाव ठीक नहीं, दशम राजनीति भाव का स्वामी अष्टम में आ जाने से थोड़ी कठिनाई आएगी।

यहां शनि केतु के साथ है। वैसे शनि मित्र राशि मिथुन का है लेकिन केतु नीच का है। दो ग्रह मित्र राशि में है, एक शत्रु का। बहुमत के आधार पर अष्टम भाव में केतु नगण्य-सा है। फिर भी अखिलेश को दुर्घटना से बचना होगा।

मंगल, बुध और शुक्र तीनों शनि के नक्षत्र में हैं। शनि गुरू का उपनक्षत्र स्‍वामी है। शनि इन कुंडली के 10 वें घर से गोचर कर रहा है जहां राहु विराजमान है। शनि का राहु के स्‍‍थान से गोचर बहुत बुरा परिणाम देता है लेकिन उच्‍च भावों में इसे या इन दोनों के होने को अच्‍छा माना जाता है।

क्‍योंकि बुध शनि के नक्षत्र में है और शनि चंद्रमा के उपनक्षत्र स्‍वामी का नक्षत्र स्‍वामी है। शनि बुध के उपनक्षत्र स्‍वामी का नक्षत्र स्‍वामी भी है। इस तरह से शनि अखिलेश यादव की कुंडली में बहुत महत्‍वपूर्ण ग्रह है। राहू 10वें घर में विराजमान है और राहु के लिए इससे अच्‍छी स्थिति कोई दूसरी नहीं होती है।

सूर्य, चंद्रमा और केतू राहु के नक्षत्र में हैं। राहू कुंडली में कई भावों का सिग्‍नीफिकेटर है अर्थात वह भाव राहू के प्रभाव में ही रहेंगे। अगर ये कहें कि राहू और शनि इस कुंडली में मुख्‍य भूमिका में हैं तो यह अतिश्‍योक्‍ति नही होगी। दसवें भाव में शनि का गोचर जहां पहले से राहू है उनके लिए योग कारक सिद्ध होगा।

अखिलेश यादव की पत्रिका में विशेष बात यह है कि नवांश में बुध उच्च का है और शुक्र नीच का, जो‍ कि नीच-भंग योग का निर्माण कर रहा है। शनि उच्च का है, मंगल स्वराशि वृश्चिक का है। चन्द्र कर्क स्वराशि का है।

उज्जैन (मध्यप्रदेश) के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार ग्रहों की इन्ही अनुकूलता के चलते ही अखिलेश यादव इतने कम समय मे लोकप्रिय हो गए हें। यदि थोडी़-सी सावधानी व अभिमान को दूर रखकर चलेंगें तो सफलता मिलती रहेगी और पिता का नाम रोशन हो सकता है। कुल मिलाकर अखिलेश के सितारे, बुलंदी के इशारे कर रहे हैं।


मायावती की जन्म कुण्डली

उत्तर प्रदेश में प्रमुख पार्टी बसपा की प्रमुख मायावती का जन्म 15 जनवरी सन् 1950 को रात्रि 7 बजकर 50 मि0 पर दौलतपुर(उत्तर प्रदेश) में हुआ था।

सुश्री मायावती कर्क लग्न एवं मकर राशि में जन्म लेने वाली जातक हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जो घनिष्ठा नक्षत्र एवं सिद्धि योग में जन्म लेते हैं वे जीवन में शून्य से शिखर तक पहुंचते हैं।

इंसान की किस्मत में यदि सितारे उसके साथ हो तो वह बुलंदियों को हासिल कर ही लेता है। इसी एक मिसाल है यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती। सुश्री मायावती की कुंडली में कई प्रबल और दुर्लभ योग हैं। इनकी ही वजह से वह आने वाले लोक सभा चुनाव में गहरी छाप छोड़ेंगी। दस से ऊपर शानदार ग्रहीय योग और महा दशाओं के चलते आने वाले समय में राजनीति की धूरी इनके पास ही घूमेगी।

उज्जैन (मध्यप्रदेश) के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने इनकी कुंडली का गहन अध्यन किया और उसके परिणाम निम्न रहे–

सुश्री मायावती की कुंडली में भाग्येश गुरु की सिंह राशि में स्थिति घोषित एवं अघोषित दोनों तरह की संपत्ति का स्वामी बनाता है। नीचस्थ केतु का एकादश भाव में स्थित होना इसे और भी बल देता है। पंचम स्थान में स्थित राहु, शनि एवं मंगल जातक को बेहद महत्वाकांक्षी बना देता है और लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में नैतिकता आड़े नहीं आती है।

मायावती की कुंडली में मंगल कर्म स्थान का मालिक है। मंगल, शनि और राहु के साथ स्वग्रही होकर पंचम स्थान में स्थित है। सप्तम स्थान में मकर राशि का सूर्य और चंद्रमा गृहस्थ जीवन के सुखों से अलग कर देता है।

लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भागवत होकर लग्न पर दृष्टि निक्षेप कर रहा है। लग्नेश चन्द्रमा को 1.55 षड्बल प्राप्त है। लाभ भाव का स्वामी शुक्र भी चलित चक्र में चन्द्रमा से सप्तम भाव में संयुक्त है और लग्न पर दृष्टिपात कर रहा है। धनेश सूर्य के साथ, लग्नेश चन्द्रमा की युति तथा दद्दशेष बुद्ध के साथ सप्तम भाव में परस्पर युति से संबंध के कारण ही मायावती अविवाहित हैं।सप्तमेश शनि स्व नक्षत्र अनुराधा में स्थित है। शनि को 1.36 षड्बल प्राप्त है। अतः शनि कृत विवाह अवरोध सम्पुष्टि हो रही है।

पिछले विधानसभा निर्वाचन के समय सुश्री मायावती की कुंडली में शनि की महादशा में मंगल की अंतरदशा चल रही थी।सुश्री मायावती की कुण्डली में इस समय बुध की महादशा में केतु का अन्तर चल रहा है।

बुध पराक्रमेश व द्वादशेश होकर सप्तम भाव में सूर्य व चन्द्रमा के साथ स्थित है। केतु लाभ भाव में शुक्र की राशि में वृष में बैठा है किन्तु केतु की यह स्थिति नीच की है। कुण्डली का एकादश भाव मित्रों व प्रशंसको का प्रतिनिधित्व करता है। केतु की नीचता के कारण ही बसपा के प्रबल समर्थक व शुभ चिंतक स्वामी प्रसाद मौर्य व आरके चौधरी जैसे लोगों ने पार्टी को छोड़ दिया।

चूँकि अष्टम का शुक्र लाभकारी होता है। इस भाव का शुक्र साझेदारी व गठबंधन से लाभ करवाता है। जैसी की मेने सम्भावना व्यक्त की थी बसपा और समाजवादी पार्टी का गठबंधन हो जायेगा। ये दोनों पार्टियॉ मिलकर देश के आगामी चुनाव लड़ेंगी। इस गठबंधन से दोनों का फायदा होगा लेकिन सबसे अधिक लाभ बसपा को ही प्राप्त होगा। यह समय मायावती व बसपा दोनों के लिए समय अनुकूल रहेगा। शुक्र चतुर्थेश व लाभेश होकर अष्टम भाव में अपने मित्र की राशि कुम्भ में बैठा है।
👉🏻👉🏻 ये हें मायावती की जन्म कुंडली मे शुभ योग–

  1. सूर्य बुद्ध योग — कुंडली में सूर्य और बुद्ध एक साथ विराजमान हैं। इसकी वजह से मायावती मधुर भाषी हैं, इसीलिए वह लोगों को आकर्षित करती हैं। चतुर विद्वान, धनवान, अनुशासित सेवाभाव रखने वाली, इस योग के जातक अपने कार्यों की वजह से प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं।
  2. संख्या केदार योग — इस योग की वजह से मायावती का निर्णय काफी चंचल रहता है। मतान्तर से बुद्धिमान निर्णय होता है। ऐसे जातक लोगों की चिंता करने वाले होते है। वह उपकारी और दीर्घजीवी होते हैं।
  3. वोशि योग — इस योग में जन्मे जातक दानशील और कीर्तिमानी होता है। ऐसा जातक अक्सर चर्चाओं में रहता है। ये योग जातक का घर और प्रदेश के बाहर भी चर्चा कराता है। जातक की स्मरण शक्ति जबरदस्त होती है। स्थूल शरीर धारी होता है। राजा के तुल्य होता है।
  4. पर्वत योग — शुभ गृह केंद्र में 6 और 8 का भाव गृह युक्त हो तो शुभ पर्वत योग बनता है। लग्नेश और व्येश परस्पर केंद्र स्थित होकर मित्र ग्रहों की और दृष्टि हो तो यह योग बनता है। इस योग का जातक गुनी वक्ता होता है।
  5. संख योग — इस योग का जातक दयालु, पुण्यकार्य और शुभ आचरण वाला होता है। सत्कर्म में रूचि धार्मिक विद्वान तथा आनंद प्रिय और पारिवारिक दृष्टि से भी सफल होता है।
  6. केंद्र त्रिकोण राज योग — इस योग में ग्रहों के योग चार प्रकार के बनते हैं,
  7. जब दो गृह परस्पर देखते हो।
  8. जब एक गृह दूसरे को देखता हो।
    3 जब दो ग्रहों में राशि परिवर्तन हो।
  9. जब दो गृह एक ही राशि में हो तब ये योग बनता है। इसका जातक सम्मान तथा हर प्रकार के वैभव से युक्त होता है।
  10. राजयोग — जातक के सफलता, सम्मान, प्रतिष्ठा में लगातार वृद्धि होती है। कठिनाइयों के बाद भी जातक की कीर्ति बढ़ती ही जाती है।
  11. धन योग — सत्ता को सुचारू रूप से चलाने वाला होता है। घर के साथ राज्य को धनवान बनता है। नीतियां उत्कृष्ट रहती हैं, जो अक्सर चर्चाओं में रहती हैं।
  12. दानयोग — जातक अत्यधिक दानशील होता है। भाग्य योग और राजयोग इस योग में लगातार वृद्धि करते हैं।
  13. गणित विद्याजन योग– जातक अपने क्षेत्र का कुशल गणितग्य होता हैं। राजनीति में शिखर तक की पकड़ होती हैं।

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